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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Thriller

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Thriller

स्वागत गीत

स्वागत गीत

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स्वागतम्,

जी स्वागतम्।

हे शुभ अतिथि,

तव स्वागतम्।

आपको निज बीच पाकर,

बहुत ही अभिभूत सब हम ।

स्वागतम्,

जी स्वागतम्।

हे शुभ अतिथि,

तव स्वागतम्।


है बहुत आभार अतिथि,

आपने जो दरश दीन्हा।

गेह का कण-कण है आभारी,

तव चरण रज से पावन कीन्हा।

तव कृपा करें व्यक्त कैसे?

हो गये निशब्द सब हम।


स्वागतम्,

जी स्वागतम्।

हे शुभ अतिथि,

तव स्वागतम्।

आपको निज बीच पाकर,

बहुत ही अभिभूत सब हम।

स्वागतम्,

जी स्वागतम्।

हे शुभ अतिथि,

तव स्वागतम्।


बस यही विनती हमारी,

नेह निज रखिए बनाए।

देते रहिए आप दर्शन,

जब कभी इस ओर आएं।

कर दीजिए परिसर को पावन,

करें तृप्त फिर निज चक्षु सब हम।


स्वागतम्,

जी स्वागतम्।

हे शुभ अतिथि,

तव स्वागतम्।

आपको निज बीच पाकर,

हैं बहुत ही अभिभूत सब हम।

स्वागतम्,

जी स्वागतम्।

हे शुभ अतिथि,

तव स्वागतम्।


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