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Uma Vaishnav

Abstract


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Uma Vaishnav

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सुप्रभात जी

सुप्रभात जी

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दिनकर आये भोर ले, उठजा मानव जाग।

मात पिता को नमन कर, खुल जायेगे भाग।। 


आस किरण लेकर उठो, आई है नव भोर।

दिनकर प्रकाश कर रहे, पक्षी कर रहे शोर।।


जग में प्रकाश कर रहे, दिनकर दादा रोज।

उठजा मानव जाग जा, खुद में प्रभु को खोज।। 


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