STORYMIRROR

Uma Vaishnav

Others

3  

Uma Vaishnav

Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
187

दीप से दीप की लौ जला दीजिए।

रात को आज दिन फिर बना दीजिए।।

रोशनी प्यार की फिर दिखे हर तरफ,

आज आशा नई फिर जगा दीजिए।।

रोज उम्मीद  के साथ उड़ना हमें,

दायरा आसमाँ का खुला दीजिए ।।

चाँदनी से भरी रात बीते नहीं,

चाँद से हाथ अपना मिला दीजिए।।

राह काँटों भरी फिर मिलेगी उमा,

हौसलों से कदम फिर बढ़ा दीजिये।।



Rate this content
Log in