सुनो इतना आसान है क्या?
सुनो इतना आसान है क्या?
सुनो! इतना आसान है क्या? ज़िंदगी में आगे बढ़ जाना..कल तुम्हें किसी को फूल देते देखा..
वही फूल जो कभी हमारे जुल्फों में सजाया करते थे,
तो सोचा पूछ लूँ, इतना आसान है क्या?
आँखों में तुम्हारी उसी जान को देखा,
जो कभी मुझ पे लुटाया करते थे,
होंठों पे वही मुस्कान, वादों की वही दुकान..
कल हमारे चाँद को हमने दूसरों की बांहों में देखा..
सोचा रुक के पूछ ले एक दफ़ा.. इतना आसान है क्या?

