सुंदरता
सुंदरता
मन की सुंदरता...!
कोई नहीं देखता आजकल,
सारी दुनियां
सुंदर तन की दीवानी है.
मन भले ही चाहे किसी को,
जरूरी नहीं कि
कोई उसे भी चाहे.
नजरें ढूंढती रहती हैं
जिस चकाचौंध को
हरदम,
जाहिर है शख्सियत को
उधर ही जानी है.
दूसरी तरफ
सुसज्जित तन भी
बैठी रहती है
घात लगाए फांसने
जड़ मन को.
सहज ही अपने
रूप के आकर्षण से
सामने वाले को
बरगलाकर
करती हमेशा मनमानी है
और मन...!
चाहेे छल- कपट से दूर हो
चाहे लाख गुणवान हो,
अच्छाईयां कूट-कूट कर
भरी हो उसमें.
स्वाभिमान की रक्षा के लिए
जो हित की बात करे
तो लोग उसे
कहते ही स्वाभिमानी हैं
स्त्री हो या पुरुष
अक्ल मायने रखती है
सूरत का क्या है
वोआज है तो कल नहीं
मगर सीरत
उसका साथ तो
ज़िन्दगी के साथ भी और
ज़िन्दगी के बाद भी निभानी है
