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अनजान रसिक

Inspirational

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अनजान रसिक

Inspirational

सुन मेरी प्यारी सखी

सुन मेरी प्यारी सखी

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सुनो तुम मना चाहे कोई पर्व किसी के लिए भी ले लेना,

पर भूलना मत की तुम भी एक इंसान हो इसलिए अपने लिए ज़रूर जीना.

तुम चाहे भूखी रह लेना, प्यासी तड़प लेना,

पर त्याग तुम्हीं मत देना, कुछ अपेक्षा औरों से भी रखना.

खाना बनाओ सबके लिए तो कुछ हिस्सा खुद के लिए भी रख लेना,

सबके स्वास्थ्य का ध्यान रखते- रखते ,परोपकार की मिसाल बनते-बनते , खुद को मत भुला देना.

हाँ! तुम माँ हो.. पर हमेशा तुम बालकों पर जान लुटाओ, ये ज़रूरी तो नहीँ,

कुछ अवसर उनको भी देना, कुछ महत्त्वता की हिस्सेदार तुम भी बन जाना.

शारीरिक बनावट से भले ही कमसिन हों, पर याद रखना तुम ना कम किसी से भी हो,

इसलिए आगे बढ़ते हुए हरदम, प्रगतिशीलता को कायम रखना.

बलिदान असंख्य दे दो भले ही पर बल अपना कभी ना खोना,

राह में आये हर कंकड़ को ठोंकर मार मुँह तोड़ जवाब देना.

समाज और परिवार से पहले, सबसे पहले, खुद से तुम प्रेम करना,

और इस तरह तुम अपना अस्तित्व भी सदा ज़िन्दा रखना.


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