सुखद सफर
सुखद सफर
सफल सुखद रहे सफर तुम्हारा प्रभु से यही प्रार्थना है,
जीवन का हर पल सुख से बीते प्रभु से यही कामना है।
जीवन के नये नये आयामों में नव नूतन सुख पाओगे,
निर्भीक व चिंता रहित हो स्वयं ही आगे बढ़ जाओगे।
संघर्ष से जिसने लड़ना सीखा उसे नहीं चिंता गम है ,
अपने स्वयं को पढ़ लेना किसी विद्धता से नहीं कम है।
जीवन की यह लम्बी यात्रा सहज सरल सुखद होती है,
जो परिवर्तन से डरता उसकी यात्रा तो दुखद होती है।
परिवर्तन प्रकृति का नियम उससे कभी नहीं डरना है,
जिसको बदल नहीं सकते उसको स्वीकार करना है।
होनी तो होकर रहती और अनहोनी ना हो सकती है,
निज बुद्धि विवेक से चलना सब दुनिया यही कहती है।
परम पिता जो परमेश्वर सदा साथ सभी के वो रहता है,
फिर कोई भी नहीं अकेला बीपी भी तो यही कहता है।
सबके अंदर मन मंदिर में भगवान का बास रहता है,
इसी आधार पर हर प्राणी का ईश्वर पर विश्वास रहता है।
