STORYMIRROR

Shivam Vishwakarma

Abstract

4  

Shivam Vishwakarma

Abstract

सत्य

सत्य

1 min
309

कोई भी किसी का हमेशा के लिए नहीं होता, 

तो ये दिल क्यूं ही किसी के लिए रोता है।


हासिल तो कर ही लेता है हर कोई किसी को भी इक पल के लिए,

पर बिछड़ कर उससे वह अपनी आंखें क्यूं है भिगोता।।


भरोसा तो इक पल के लिए सभी जता ही देते हैं,

पर कोई किसी का हमेशा के लिए क्यूं नहीं होता।।


समझ में तो आ ही जाती है सभी के दिल की बातें,

पर कोई यूं खफ़ा होगा ये भरोसा नहीं होता।।


सभी में खुद को सच्चा समझने का भ्रम भरा पड़ा है,

पर कोई खुदा के लिए खुद से सच्चा क्यूं नहीं होता।।


अच्छेपन का मुखौटा जब से बाजारों में मिलने लगा है,

तब से चेहरा एक नहीं सबके पास दो चार है होता।।


कोई भी किसी का हमेशा के लिए नहीं होता

तो ये दिल क्यूं ही किसी के लिए है रोता...,,


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract