सरल नहीं जीवन के रस्ते
सरल नहीं जीवन के रस्ते
सरल नहीं जीवन के रस्ते, सरल बनाने पड़ते हैं।
सदा फूल ही नहीं, राह में काँटे भी मिल सकते हैं।
कठिन गणित है इस जीवन का, पर इतना भी कठिन नहीं।
जीवन एक अबूझ पहेली, पर इतनी मुश्किल भी नहीं।
सुगम रास्तों पर चलने वाला कमजोर कहाता है।
चुनौतियों से टक्कर लेने वाला नाम कमाता है।
कड़ी धूप में शीत लहर में, सीना ताने खड़े हुए।
दुर्गम पर्वत की चोटी पर बहादुरी से डटे हुए।
सुगम नहीं थे वो रस्ते, लेकिन वो वीर सेनानी थे।
चीर सकें दुश्मन का सीना, वो ऐसे तूफानी थे।
भारत को आजाद कराने में जीवन बलिदान किया।
कितने ही छोटे लालों ने निज जीवन कुर्बान किया।
गुरु गोबिंद के दो बच्चे चमकौर के युद्ध में खेत हुए।
दो बच्चे जीते जी ही दीवार में चिनवा दिये गए।
जीते जी ही गोविंद जी के पिता का शीश काट डाला।
विचलित हुआ न धर्म से फिर भी, वो था पक्का दिल वाला।
सरल नहीं था सहना यह सब, देश की खातिर सभी सहा।
मन में चाहे शोक बहुत हो, लेकिन मुख से नहीं कहा।
सीखो कुछ तुम इन वीरों से जीवन कैसे जीते हैं।
अपने लिए नहीं जीते, जो देश की खातिर जीते हैं।
