STORYMIRROR

Vinita Rahurikar

Abstract

3  

Vinita Rahurikar

Abstract

सपनों की दुनिया में

सपनों की दुनिया में

1 min
167

दिन भर की

भागदौड़ के बाद

खोने दो मुझे

सपनों की दुनिया में।


तेज धूप की तपन में

झुलसे हुए मन को

थोड़ा चाँदनी में

डूब लेने दो।


बैठ जाऊँ

चाँद की छाया में

रातरानी, मधुमालती से

कुछ मन की बात कर लूँ।


छोड़ सारी झंझटों को

कुछ देर तो

जी लूँ अपना जीवन

अपनी इच्छा से।


सपनों में ही सही पर

जी तो लूँ....।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract