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JAYANTA TOPADAR

Inspirational

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JAYANTA TOPADAR

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संकीर्णता : एक चिरव्याधि...

संकीर्णता : एक चिरव्याधि...

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अपने मन का द्वार सहर्ष खोलें...

बस अच्छा ही बोलें...

ये संकीर्णता तुम्हें बीमार कर देगी ;

अब तो सुधर जाइए...!


जब भी मुँह खोलें

तो बस शुभ-शुभ बोलें...!

दुसरों को कटु-कथा सुना-सुनाकर,

ज़रा ग़ौर फरमाइए,

क्या से क्या बन गए हैं आप...!!


परचर्चा-परनिन्दा बुरी बला है।

जो भी इसके मोहपाश में

बंदी होकर अपना सुधबुध खो देते हैं,

उनका विनाश-काल प्रारंभ होता है...


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