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Ruchika Rai

Abstract

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Ruchika Rai

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संगीत

संगीत

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बेवज़ह की किसी के लिए न हो दुर्भावना,

न किसी कार्य का आधार हो संभावना,

प्रेम प्रज्वलित हो हर दिल में सदैव,

सबके अन्तस में सदा हो प्रेम की भावना।

संगीत की धुन ऐसे बजे, संगीत की धुन ऐसे बजे।


कर्मरत हो सदा ही मन में अच्छाई हो,

नहीं किसी के लिए मन में बुराई हो,

हो सदा ही दूसरों के हित के लिए कर्मरत,

पाक उर सदा मन में सच्चाई हो।

संगीत की धुन ऐसे बजे, संगीत की धुन ऐसे बजे।


नदियों की तरह अविरल बहे हम,

बात गलत कभी न कहे हम,

सूर्य की तरह रोशनी दें जग कल्याण हेतु,

पीर दिल की खुद ही सहे हम।

संगीत की धुन ऐसे बजे, संगीत की धुन ऐसे बजे।


तोड़ दें जगत के सारे मिथक को,

प्रेरणा दें अपने जीवन से जगत को,

टूटे जो हौसला तो खुद ही दुरुस्त करें,

गुमनाम न हो जाये कभी हम कल को।

संगीत की धुन ऐसे बजे, संगीत की धुन ऐसे बजे।


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