संघर्ष कर तुझे जीना होगा
संघर्ष कर तुझे जीना होगा
तुच्छ नही तू ,
मानवता का अमूल्य धरोहर है,
लिख इतिहास अपना ,
तू मनुज मनोहर है।
हृदय विदारक पीड़ा होगी,
कुमुद कुसुम- सा खिलना होगा ,
कीचड़ की दलदल होगी,
पर सुगंधित कर्मपथ से मिलना होगा।
टूट जाए ना मन तेरा,
निष्ठुर संसार पाषाण होगा,
संघर्ष कर जीना होगा,
संकट में हरदम प्राण होगा।
सामना चुनौतियों का
प्रतिपल तुम्हें करना होगा,
प्रतिस्पर्धा स्वयं ही से हो तेरा,
हार कर यूं ना मरना होगा।
शाश्वत नहीं यहां कुछ भी,
फिर विश्वास तेरा क्यों निर्बल है,
कर्मयोगी साहसी तू ,
ईश तेरे सदा सहायक संबल है।
चुभते नित कर्कश बाण,
घायल साहस ना हो जाए,
विचलित क्षण-क्षण मस्तिष्क,
कैसे मंजिल को पाएं।
थककर थम गए जो कदम,
तो जीवन का क्या प्रबंध होगा,
माया प्रभु का समझ ना सका,
कैसा तेरा अनुबंध होगा।
अशांत-क्षुब्ध परिवेश,
खामोश इसे होना होगा,
तटस्थ राही तू ,
धवल किरण की आश ना खोना होगा
धोखे की परछाई यत्र-तत्र ,
भटकना दर-बदर होगा,
संघर्ष कर तुझे जीना होगा,
बन कोहिनूर कदर होगा ।
