STORYMIRROR

KIRIT PARMAR 🇮🇳

Tragedy

2  

KIRIT PARMAR 🇮🇳

Tragedy

समजता गया लोगो को..

समजता गया लोगो को..

1 min
145

सबसे ज्यादा जिन लोगों को जाना मैने

उन्होंने दुःख दिया ढेरो सारा मुझे

उलझनो मे उलझने दिया देखकर भी मुझको

बस साथ ही नही दे पाए अपना

बिन साथ के इन अकेलेपन में 

खुद ही खुद में खोया रहा

बह गया झूठी उनकी भावनाओं में 

जिन्दगी के सफर में समझता गया लोगों को!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy