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Shivanand Chaubey

Abstract

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Shivanand Chaubey

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समाज

समाज

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समाज भाव के एहसास है

समाज रिश्तों का बन्धन हैं,

समाज जुड़ाव हैं दिलों के

समाज प्रेम का अभिनंदन हैं।


समाज इश्क प्रेम की गाथा हैं

दया करुणा की परिभाषा है,

समाज स्नेह की बगिया हैं

समाज सामर्थ्य की आशा है।


समाज अस्तित्व की संकल्पना हैं

समाज जीवन की संरचना हैं,

समाज रिश्तों की विविधता है

समाज मानवता की कल्पना है।


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