Anuj Pareek
Tragedy
तेरी फितरत भी कुछ सियासत सी थी
सरेआम मोहब्बत जता कर मुकर गई।
प्रेम की सार्...
अमीर घर की औल...
सबसे खतरनाक ह...
थामना चाहता ह...
समझ क्यों नही...
इंसान
Kuch Tum Kaho...
यादों की गिरफ़...
मिला ही नहीं
खुशियों का सौ...
तुमने जगत जननी नारी को निर्वस्त्र दिखाया है। तुमने जगत जननी नारी को निर्वस्त्र दिखाया है।
मुझे चलाना तब जब इनमें से तुम्हें एक भी बदलने से सरोकार है। मुझे चलाना तब जब इनमें से तुम्हें एक भी बदलने से सरोकार है।
जहां तक पड़ रही थी निगाहें, धुआं ही धुआं था फैला। जहां तक पड़ रही थी निगाहें, धुआं ही धुआं था फैला।
उससे पूछो जो डिप्रेशन से जूझ रही है हर पल जीते जी बस मर रही है। उससे पूछो जो डिप्रेशन से जूझ रही है हर पल जीते जी बस मर रही है।
बिन भ्रम असली पहचान ही लेगी, मधुमक्खी और प्यारी सी तितली। बिन भ्रम असली पहचान ही लेगी, मधुमक्खी और प्यारी सी तितली।
लिखो आज तुम कुछ उन मजदूरों के नाम ! लिखो आज तुम कुछ उन मजदूरों के नाम !
वह प्रजाति के और केवल भारत में ही पाए जाते हैं। वह प्रजाति के और केवल भारत में ही पाए जाते हैं।
धक्का देकर आज भगाया, जानवर ही ठीक था मजदूर क्यों बनाया। धक्का देकर आज भगाया, जानवर ही ठीक था मजदूर क्यों बनाया।
खुलल लोक डाउन अब खूब कमइहा ये भइया। खुलल लोक डाउन अब खूब कमइहा ये भइया।
चलो शुक्र है, अब चैन से मर सकूंगा मैं। चलो शुक्र है, अब चैन से मर सकूंगा मैं।
आज फिर से हम से मैं और तुम बन गए। आज फिर से हम से मैं और तुम बन गए।
तुमने उदासी से क्यों भरा मुझे यह तू ही जाने मैं क्या बोलूं। तुमने उदासी से क्यों भरा मुझे यह तू ही जाने मैं क्या बोलूं।
बस देना हमें अपने प्यार और अथाह संयम की सीख। बस देना हमें अपने प्यार और अथाह संयम की सीख।
खैर जैसे-तैसे पहचान हुई हमारी दोस्ती की एक नई शुरुआत हुई । खैर जैसे-तैसे पहचान हुई हमारी दोस्ती की एक नई शुरुआत हुई ।
बेचैनियों का उन्माद बढ़ने लगा है, अधूरापन जीवन में भरने लगा है। बेचैनियों का उन्माद बढ़ने लगा है, अधूरापन जीवन में भरने लगा है।
अपनी अच्छी आदतों व कर्मो से, आदमी रोशन करता खानदान है। अपनी अच्छी आदतों व कर्मो से, आदमी रोशन करता खानदान है।
करोना के चक्कर में स्कूल भी बंद है, करोना के चक्कर में स्कूल भी बंद है,
ये सब दुकानदार अब नहींं दिखते जो सड़कों पर चलते फिरते थे ! ये सब दुकानदार अब नहींं दिखते जो सड़कों पर चलते फिरते थे !
ख्वाहिश जीने की त्याग चुकी है, प्राण त्यागना बाकी है। ख्वाहिश जीने की त्याग चुकी है, प्राण त्यागना बाकी है।
उसने तो अमृत छलकाया, अपने हिस्से विष ही आया उसने तो अमृत छलकाया, अपने हिस्से विष ही आया