Anuj Pareek
Drama
जिसने चाहा हमें
उसको कभी हमने चाहा नहीं।
हमने जिसको चाहा
वो कभी हमें मिला नहीं।
प्रेम की सार्...
अमीर घर की औल...
सबसे खतरनाक ह...
थामना चाहता ह...
समझ क्यों नही...
इंसान
Kuch Tum Kaho...
यादों की गिरफ़...
मिला ही नहीं
खुशियों का सौ...
उँचे गगन में उड़ान भरते हैं मौसम की तरह बदल जाते हैं। यह तो हर साल होता है पतझड़ के पंछी... उँचे गगन में उड़ान भरते हैं मौसम की तरह बदल जाते हैं। यह तो हर साल होत...
कर रही यथाशक्ति मैं निर्माण अपना, सत्य करना है जो देखा है सपना...! कर रही यथाशक्ति मैं निर्माण अपना, सत्य करना है जो देखा है सपना...!
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
इन्हीं औरतों की नस्लें छीन लाती हैं तुम्हारे लिए इंद्रधनुष के सारे रंग। इन्हीं औरतों की नस्लें छीन लाती हैं तुम्हारे लिए इंद्रधनुष के सारे रंग।
छंदमुक्त कविता...! छंदमुक्त कविता...!
हर बार दर्द सहकर मैंने तो यही सीखा, "मौत तू एक ख़ूबसूरत कविता है जिसे मैं रोज गुनगुनाऊँगी जब तक तू ... हर बार दर्द सहकर मैंने तो यही सीखा, "मौत तू एक ख़ूबसूरत कविता है जिसे मैं रोज ग...
सुना है आजकल ये भीड़ मे हमला करते हैं, टूट पड़ते हैं मासूम अबला पर, या शिकार करते हैं मासूम बच्चिय... सुना है आजकल ये भीड़ मे हमला करते हैं, टूट पड़ते हैं मासूम अबला पर, या शिकार क...
कई स्वर्णिम चतुर्भुज और बनाने, हाँ, अटल तुम फिर से आना...! कई स्वर्णिम चतुर्भुज और बनाने, हाँ, अटल तुम फिर से आना...!
मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है, मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है,
मैं तुझे हार कर मेरी ऐ दोस्त, फिर कहीं दूर, बहुत दूर चला जाऊँगा...! मैं तुझे हार कर मेरी ऐ दोस्त, फिर कहीं दूर, बहुत दूर चला जाऊँगा...!
मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ? मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ?
आत्मा हवस की धधकती चिताओं में सती हो जाती है। आत्मा हवस की धधकती चिताओं में सती हो जाती है।
नासमझ तो नहीं थी पर नसमझ ही बनी रहूँगी। नासमझ तो नहीं थी पर नसमझ ही बनी रहूँगी।
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है, इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है,
पराजिता निर्यातित होकर भी, पी जाती हूँ आंसुओं को, बांध लेती हूँ इच्छाओं को। पराजिता निर्यातित होकर भी, पी जाती हूँ आंसुओं को, बांध लेती हूँ इच्छाओं को।
खामोशी, कहने को तो महज अल्फ़ाज़ है, लेकिन इसका अर्थ कुछ और है, खुद में इतने सारे अल्फाजों को समेटे ह... खामोशी, कहने को तो महज अल्फ़ाज़ है, लेकिन इसका अर्थ कुछ और है, खुद में इतने सारे...
दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं. दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं.
ऐ मेरे मुल्क़ के अब फिर मिलेगी आज़ादी, ऐ मेरे मुल्क़ न कहना पड़े रोता क्यों है। ऐ मेरे मुल्क़ के अब फिर मिलेगी आज़ादी, ऐ मेरे मुल्क़ न कहना पड़े रोता क्यों है।