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Sachin Gupta

Inspirational

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Sachin Gupta

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सियाचीन का नायक

सियाचीन का नायक

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सरहद की उन वादियोंं में ,

जहांं जम जाती हैं सांसे

क्या वहां कोई इंसान जीता है?

क्या वहां कोई जीवन है?

  

हां सरहद की उन वादियोंं में,

जहां चलती हैं तेज हवाएं

छिपे- छिपे से बर्फीला वादियों में

खामोश रहती है फिजा ,

खामोश फिजा र्सद हवाएं ,

जैसे मार रही हो थपेड़े ,

बर्फीली वादियों में

हां बर्फीली वादियों में,

सोचो जरा ,

कैसे कोई यहां जीता है?

सरहद की इन वादियोंं में ,

जहांं जम जाती है सांसे

फिर भी कोई यहां जीता है

तान कर सीना अपना ,हर आलम में रहता है

मातृ-भूमी को शीश नवा, अपना र्फज निभाता है


चाहे चीन, तिब्बत हो या सियाचीन ,ग्लेशियर 

वहां भी अपना फौजी भाई ,

तानशस्त्र में रहता है

मजबूत इरादे दिल में लिए,

अपना जीवन जीता है,

और अपना फर्ज निभाता है,

कोई खुशी नहीं ,

तो कोई गम भी नहीं चेहरे पर

न ईद , न दीवाली , न कोई मिठास

न कोई होली का रंग ।

फिर भी रंगीन रहता फौजी अपना

इस खामोश फिजा में ,

अपना फर्ज निभाता है ,

अपना कर्ज चुकाता है,

      

बिन सांसो की परवाह किये,

अपना कतर्व्य निभाता है

सच मानो आप ,

सरहद की उन वादियोंं में ,

जहांं जम जाती है सांसे

वही वो इन्सान है जो,

हर पल वहां जीता है,

और उस कठोर, खामोश फिज़ा में ,

अपना फर्ज निभाता है

नायक है वो सियाचीन का

हिमखंडो से टकराकर अपना लोहा मनवाता है।

   


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