STORYMIRROR

Mr. Akabar Pinjari

Classics

3  

Mr. Akabar Pinjari

Classics

सीता की अग्नि परीक्षा कब तक

सीता की अग्नि परीक्षा कब तक

1 min
308

आज तक जो तुम्हें देखते ही नहीं थे,

देख कर आज तुमको गुनगुनाने लगे हैं,

जिनके दर्द तसव्वुर में होता रब,

करके हमको दिवाना वो अब गाने लगें हैं। 


बदल गया है सीता का रूप भी अब,

ना रही वह नज़ाकत ना रहा वह लड़कपन,

जो कल तक अदब में झुकी होती थी,

वह आजकल बेअदबी को बताने लगे हैं।


आज बदले रूप में रंगत लाना है,

जो युगों से परेशान थी उसे सजाना है,

आख़िर कब तक सीता की अग्नि परीक्षा ली जाएगी,

अब वक्त आ गया है यह घड़ी बदली जाएगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics