Gajanan Pandey
Action
सीमा पर
अपनी जान हथेली पे रखकर
फर्ज निभाते हैं
मेरे देश के वीर।
आज नम आंखो से
उन्हें याद करें
अपना फर्ज निभाएँ
उन शहीदों के नाम।
कविता के संबंध में 10 शब्द -
मेरे देश के वीर
तुम्हारी शहादत पर
शत - शत नमन।
मन आईना है
रंग
संस्कारों से ...
जिंदगी का सफर
समय
पुस्तक
ईश्वर
स्वास्थ्य ही ...
क्या भूलूँ, क...
हमारे हाथ कर्...
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ। तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ।
ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्यों ढूंढे ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्य...
ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात ना होती है ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात न...
मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर
मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ। मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ।
अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है, अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है,
छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को चीरा, वीर प्रताप की ... छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को च...
सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश
पहचान मुझे तुम क्या दोगे मैं ख़ुद अपनी पहचान हूँ, पहचान मुझे तुम क्या दोगे मैं ख़ुद अपनी पहचान हूँ,
ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे
जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ। जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ।
कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया, कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया...
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे ह...
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान, अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान,
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।
अटल विचार है व्यवहार है जेठ की भरी दोपहरी के बिहारी प्रज्वलित मशाल है। अटल विचार है व्यवहार है जेठ की भरी दोपहरी के बिहारी प्रज्वलित मशाल है।
हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे। हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे।