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Deepika Mishra

Abstract

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Deepika Mishra

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शतरंज का खेल

शतरंज का खेल

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इस जीवन का खेल भी

शतरंज जैसा है,

हर कोई शह और मात

का खेल, खेल रहा है।


बिसात बिछी हुई है

और सामने वाला खिलाड़ी

अपनी चाल का

इंतज़ार कर रहा है।


मकसद एक ही है

सबका पर रास्ता

अलग चुना है,


कौन कैसे पाता है मंजिल

इस पर फल टिका हुआ है।


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