श्रृंगार का अधिकार
श्रृंगार का अधिकार
माना उम्र नहीं सजने की फिर भी करती हूं ऋंगार
मैं औरत हूं औरत को सजने का है पूरा अधिकार।
सर के बाल सफेद हुए चेहरे पर उम्र की रेखाएं
ढीली पड़ गई बदन की चमड़ी आंखों से दिख न पाएं।
कितने सावन बीत गए अब कौन रखे इसका भी हिसाब
मैं तो चलती साथ वक्त के कौन रखे चेहरे पे हिजाब।
शौक़ अभी भी जवां हैं मेरे और जवां मेरे अरमान
अभी भी मेरी ढली जवानी भरती ऊंची लंबी उड़ान।
मुखड़े पर पाउडर और लाली आंखों में पहनूं काजल
एक नज़र में अब भी कर दूं दीवाने दिल को घायल।
जब दी है भगवान ने मुझको प्यारी प्यारी सी सूरत
तो क्यों ना मैं मेकअप करके और भी लगूं खूबसूरत।
औरत को हर उम्र में हक़ है दिखने का सुन्दर और हसीन
मानो या ना मानो सोलह आने मेरी बात मुबीन।
