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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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श्रमिकों के हित

श्रमिकों के हित

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सब ही संसाधन बनें सार्थक ,

जब श्रम शक्ति का हो संचार।

सभी शक्तियां तब ही हैं सहायक,

बिन श्रम शक्ति तो हैं सब बेकार।।


माना आज तकनीक का बोलबाला है,

 श्रमिक के श्रम का महत्त्व निराला है।

पेट भरने के लिए मेहनत करनी ही होगी,

 भोजन नेट से डाउनलोड नहीं होने वाला है।।


सदा से मजदूर रहा है पिछड़ा और मजबूर,

लोगों को महल देने वाला रहा खुद छत से दूर।

सफलता की कुंजी परिश्रम- करता रहा भरपूर,

समाज को देता सुविधाएं- खुद उनसे विहीन मजदूर।।


एक दिन एक मई को ही हम मजदूर दिवस मनाते हैं,

वर्ष के बाकी दिन सोते रहते -मजदूर वहीं रह जाते हैं।

कथनी-करनी में भेदभाव ही इस समस्या का कारण है,

रामराज्य हित बनें राम दहन करना विनाश का रावण है।


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