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Neeraj pal

Inspirational

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Neeraj pal

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श्रेय पथ।

श्रेय पथ।

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श्रेय पथ पर राही चल कर देखो, हर्षानंद पा जाओगे।

 संकीर्ण मार्ग युक्त यह होता, भव-रोग मुक्त हो जाओगे।।


 अध पतन युक्त प्रेय पथ का होता, अवसाद ग्रसित जीवन वह जीता।

 माया पिशाचिनी उभरने न देती, व्याकुल हो हृदय तड़पता फिरता।।


 प्रलोभनों पर जो ध्यान हैं देते, मकड़- जाल में फंसता ही जाता।

 अर्थ कामना शून्य जीवन श्रेय का, लक्ष्य पूर्ण उसका हो पाता।।


 दुर्गम पथ के "गुरु" हैं सहायक, अंतः करण में जो धारण हैं करते।

 अमृत पान, सोमरस करवा कर, अंतर पीड़ा की प्यास हैं बुझाते।।


 पुलकित होगा हृदय तब तेरा, निर्निमेष दर्शन होंगे प्रियतम से।

 योग के साथ वियोग भी होगा, अश्रु छलके तब नैनों से।


 विरह अग्नि में मीरा भी तड़पी, दर्शन बिन प्रभु घनश्याम के।

" नीरज" तू भी लगन लगा ले, श्रेय पथ को अपना के।। 


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