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Neerja Sharma

Abstract

4.8  

Neerja Sharma

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श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि

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आतंकवाद , एक कलंक समाज के लिए ,

संसार व पूरी मानव सभ्यता के लिए ।


प्रत्यक्ष या परोक्ष पीड़ित हैं हम सब 

कभी धर्म -जाति, कभी सयासी दावपेच।


मानव प्रवृति जटिल , तुरंत भ्रमित हो जाए

इर्ष्या,द्वेष ,अलगाव अपने रंग दिखा जाए।


परिणाम,अनगिनत मौतें, हर कोई लाचार 

किस-किस की बात करें, हर तरफ हाहाकार ।


धरती का स्वर्ग ,अब खून की नदियां बहती हैं 

खून खराबा मारकाट साथ लिए चलती हैं ।


किसे कहें ,समझाएं, समझ में न ये बात आए

हाथ आएँ लाशों के ढेर सब बैठे मातम मनाए ।


मात- पिता की आहें ,पत्नी की सूनी मांग 

बच्चों की सिसकियां ,बहनों की सूनी आंखें ।


गांव की सूनी गलियाँ मानों नज़रें टिकाएँ

इन दुश्मनों के लिए गूंजे हर तरफ बददुआएँ ।


इंसानियत के दुश्मनों समझ लो यह बात 

जब तुम से मरते कफन भी नसीब नहीं होते ।


माँ भारती शहीद को पाने, दोनों जहाँ तरसते 

देव तो स्तुति करते, मानव भी सजदा करते ।


भावभीनी श्रद्धांजलि पुलवामा वीरों

शत शत नमन वीर फौजी भाइयों।




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