STORYMIRROR

J P Raghuwanshi

Abstract

3  

J P Raghuwanshi

Abstract

शरद

शरद

1 min
341

सब गलियां निर्मल भयी,

पावन शरद ऋतु आई है।

घर आंगन सुंदर सजे,

वही पवन सुखदाई है।


हल्की-हल्की ठंड आई,

मौसम भया सुहाना।

पकी धान, आनंद घर छायो,

सब मिल गाओं तराना।


दीवाली की करो तैयारी,

खूब रंगोली बनाओं।

सब मिलकर के दीये जलाओं,

मां को खूब मनाओ।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract