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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Inspirational

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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Inspirational

शराब!!

शराब!!

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मद-मदिला-मदान्धता,

धन-धान्य सर्व विनाशता।

पत्नी-पुत्री समरूप क्या??

हाय! रे मनुज तेरी मूढ़ता।।

मद-मदिला-मदान्धता.....


गीता-वेद सा समाज शुद्ध है,

हिरण्यगर्भा अवनि तुमसे अशुद्ध है ।

समाज से तुम तुमसे समाज नहीं,

मय से ही विकास पथ अवरुद्ध है ।।

हिरण्यगर्भा अवनि तुमसे अशुद्ध है ..…


संस्कार परवरिश में क्षीण हो जाएगी,

बचपन की सीख भी मदिरा प्रवीण हो जाएगी ।

वंशावली की जोड़ हो तुम,

संभलो वर्ना खुशियों में ऋण हो जाएगी ।।

संस्कार परवरिश में क्षीण हो जाएगी....


तुम मनु वंशज भरत के अनुयायी हो,

नादान बालपन के पितृत्व सुखदायी हो ।

मदिरा पाप का कारण केवल,

मय से सुखों की सदा बिदाई हो ।।

तुम मनु वंशज भरत के अनुयायी हो...…


जीवन के आधार तुम ममता की पुकार हो,

सुख दुख दोनों भाई का सदा सत्कार हो ।

लड़खड़ाए जो चाल खुशियों की,

उस शराब का समाज से तिरस्कार हो ।।

जीवन के आधार तुम ममता की पुकार हो....



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