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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Abstract Inspirational

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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Abstract Inspirational

शंकर छंद

शंकर छंद

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आशाऍं बन दीप जलेंगी,रखिए सुविश्वास ।

महक उठे फिर बगिया हिय की,रखो जी अनुवास ।।

    आशाऍं बन दीप जलेंगी....


जन-जन को अब तुम जगाइए,जागरण सत्कर्म ।

रखिए परहित में आप सदा,देते सहज मर्म ।।

मिलता कैसे जग में देखो,राम को वनवास ।


धरिए जी प्रेम सद्भावना,शांत रखो पिपास ।।

आशाओं से फिर चमकेगा,बनकर चंद्रहास...

    आशाऍं बन दीप जलेंगी....


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