शक्ति का नाम ही नारी है
शक्ति का नाम ही नारी है
सिर्फ नारी नहीं ,
नारायणी हो तुम ,
सूरज की रश्मियों से ,
उदित होने वाली हो तुम ,
अम्बे हो तुम ,
माता हो तुम
इस संसार की जन्मदाता हो तुम ,
कोमल हो तुम कमजोर नहीं ,
शक्ति का नाम ही नारी है ,
इस संसार को जीवन देने वाली तुम ,
मौत भी तुम से हारी है ,
सिर्फ नारी नहीं नारायणी हो तुम।
कलियुग की छाती पर ,
नया सबेरा रचने वाली तुम,
तुम केवल श्रद्धा नहीं ,
पियूष की धारा हो तुम ,
आषाढ़ की वर्षा हो ,
सावन की पुरवाई हो ,
रेवा की गहरायी हो तुम।।
ममता की खान हो तुम ,
धरती का कैलाश हो तुम ,
परिवार का संस्कार हो तुम ,
देवताओं की दैवीय माया हो तुम ,
पांडवों की माता हो तुम ,
आशा की दीपक हो तुम ,
आँगन की किलकारी हो तुम ,
देश की लाज़ हो साहस हो तुम ,
सिर्फ नारी नहीं नारायणी हो तुम।।
अपने शौर्य , शील , स्नेह और साहस से,
सभ्य समाज का मान बढ़ाने वाली तुम ,
स्वर्ग शिखर छूने वाली ,
कीर्तिमान गढ़ने वाली ,
कभी ना पीछे हटने वाली ,
ममता ,समता, प्रेम,आभा हो तुम ,
सिर्फ नारी नहीं नारायणी हो तुम।।
ओम हो तुम ,
श्री हो तुम ,
इस जग की जननी हो तुम ,
जग कसुम की मुस्कान हो तुम ,
ईश्वर का वरदान हो तुम ,
सूरज की रश्मियों से,
उदित चमत्कार हो तुम ,
सिर्फ नारी नहीं,
नारायणी हो तुम ,
मौत को भी मात देने वाली
चमत्कार हो तुम।।
