शख्स
शख्स
जो भी आया, इक दर्द दे के चला गया,
हर शख्स यहाँ, बेवफा सा है।
जो भी आया, बात हल्की कह के चला गया,
हर शख्स यहाँ, उथला सा है।
जो भी आया, मतलब निकाल के चला गया,
हर शख्स यहाँ, मतलबी सा है।
जो भी आया, होशियारी दिखा के चला गया,
हर शख्स यहाँ होशियार सा है।
फिर तू आया, दिल मे प्रेम बसता चला गया,
कोई शख्स यहाँ, तुझ सा बिल्कुल भी नहीं है।

