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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

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शिव ने गौरा को अंगीकार किया

शिव ने गौरा को अंगीकार किया

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गौरा ने शिव को अपने पति रूप में ही चुन लिया,

शीत व कड़ी धूप में करती रही अनवरत तपस्या!


ज़ब वह न सह पायीं थी अपमान अपने शिव का, 

तो निज शक्ति से उन्होंने मृत्यु को अंगिकार किया!


हो गई थी सती की पीड़ा शिव के लिए तब असह्य,

धरकर रौद्र रूप प्रभु शंकर ने सबका संहार किया !


शिव ने भी तब पत्नी का असीम बिछोह सहा था,

सती की प्रतीक्षा में वो प्रेम कितना विशाल रहा था!


पाने को सती का साथ शिव ने पुनः अवतार लिया,

गढ़ गये प्रेम का रूप नर-नारी का भेद नकार दिया!


दोनों के मध्य ना शिव पार्वती का अंतर किया गया,

प्रेम में अंगीकार हुए अर्धनारीश्वर को आकार दिया!



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