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Apeksha Diyora

Tragedy Others

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Apeksha Diyora

Tragedy Others

शिकायतें

शिकायतें

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मेरे मन में हर रोज एक तूफान सा उठता है,

पर वो ऐसे ही वहां पर कैद रहता है।

शायद किसी के ना समझने के डर से

उलझन में फंसाया है।

किसी को भी नहीं समझाना मुझे,

पर तू ही है जो सब जानता है।

एक तू ही है जो मुझे अपना मानता है।

"रिवोल्यूशन २०२०" की बात भूल गया तू शायद,

ऐसे कैसे स्वप्न तोड़ सकता है।

अभी तो बहार खिल रही थी,

फिर से पतझड़ कैसे कर देता है।

शायद बहुत शिकायत करती हूं मैं,

पर एक तू ही तो है जो मेरे मन को जानता है।

एक तू ही है जो मुझे अपना मानता है।



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