शहरी जीवन
शहरी जीवन
शहरी जीवन की रंगत और सुंदरता,
उसकी संस्कृति, भाषा और छटा।
ऊँचे इमारतों की गहरी छाया,
शहर की जीवनशैली की ख्वाहिश मुझको लाया।
सुबह उठते ही गूंजती है घोंसले की शोर,
दौड़ते हैं लोग, भीड़ और बहुत बहुत शोर।
बाजारों में फूलों की खुशबू में,
अनगिनत रंगों की भरमार देखने को मिलती है सबकी नजर।
सड़कों पर रंगीन गाड़ियाँ और बसें,
लोगों की भागदौड़ में होती है आवाज की वादधवनी।
मंदिरों और मस्जिदों की सजावट देखो,
अलग-अलग संप्रदायों की अनुभूति जानो।
शहरी संस्कृति की बात ना कहें तो अधूरी है,
उसमें जीने की जोश और ज़िंदादिली छुपी है।
अलग-अलग भाषाओं की मिठास बातती है इसकी ध्वनि,
बोलीबाजी और कथा कहानी सबको बहुत भाती है |
शहरी जीवन की रंगत और सुंदरता,
उसकी संस्कृति, भाषा और छटा।
नगर जीवन की रंगीन दुनिया, उसकी सुंदरता और संस्कृति,
भाषा की गहराई और बोली का माधुर्य, एक कविता में कैसे व्यक्त करूँ।
शहर की गलियों में छायी रौशनी, जगमगाते नक्शे और उच्चारणीय संगीत,
शब्दों के समृद्ध बाजार में बदले रंग, नादों की मधुर तरंगिनी सहित।
अलग-अलग जातियों की भिन्न संस्कृतियों की मिश्रणिमय धरती,
सभ्यता के अमृत से सुरमय, प्रतिभा की उगाहियों की गाथा है यह भरती।
