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Sagar Wagh

Romance

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Sagar Wagh

Romance

शहर

शहर

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कुछ बाकी था उस शहर में

जहाँ अक्सर मेरा आना जाना था,

कुछ छूटा था उस गलियों में

जहाँ मैं हर रोज गुजरा करता था,

आज भी वो शहर सुना-सुना सा

लगता है,

आज भी वो गलियाँ खफ़ा-खफ़ा सी

लगती है,


न जाने क्या छूट रहा था हाथ से मेरे

आज भी आकर तेरा इंतज़ार कर

रहा था उन गलियों में ,

आज भी उस शहर की हवाओं में नज़र

आती हो तुम,

आज भी लिखे वो ख़त बिखरे पड़े हुए है

तुम्हारी यादों में ,


ज़्यादा कुछ कहना नहीं था तुमसे

बस एक आखिरी ख़्वाहिश थी मिलने की,

अब तो वो गलियाँ और शहर जल रहे है

तुम्हारी यादों में ,

कब लौट के आओगी तुम मालूम नहीं था

आ के बुझा देना शमा मेरी

जो जल रही थी उस शहर की गलियों में ।



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