शब्द बाण
शब्द बाण
मिलती नहीं रसीद कर,
लाखों अच्छे काम।
एक चूक होकर मगर,
कर देती बदनाम।
कर देती बदनाम,
लोग जो गलती पकड़ें।
करें अनेकों भूल,
स्वयं अच्छे पर अकड़ें ।
सतविंदर तब सोच,
दरारों को है सिलती।
कर्मठ करता कर्म,
भलाई भले न मिलती।
सतविंद्र राणा
