शैतानियों की सजा.(बाल कविता)
शैतानियों की सजा.(बाल कविता)
छुक छुक छुक छुक आई रेल
बैठो सभी अब होगा खेल,
देखो आया बंदर मामा
पहने था वो लाल पैजामा,
इधर उधर उछलता है
हरदम दंगा करता है,
भालू बोला ओ बंदर मामा
क्यों करते इतना हंगामा,
सफर रेल का मजा तुम लो
खाओ पियो और जमकर सो,
हरकत ऐसी अब ना करो
शैतानियों से अपने तंग न करो,
वरना टी०टी० हम बुला लेंगे
शरारत की तुम्हें सजा देंगे,
ट्रेन से तुम्हें फिर जाना होगा
जेल की रोटी खाना होगा,
मेल जोल से रहो अभी
टिके रहोगे यहां तभी।
