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संजय असवाल "नूतन"

Inspirational Others Children

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संजय असवाल "नूतन"

Inspirational Others Children

शैतानियों की सजा.(बाल कविता)

शैतानियों की सजा.(बाल कविता)

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छुक छुक छुक छुक आई रेल

बैठो सभी अब होगा खेल,

देखो आया बंदर मामा

पहने था वो लाल पैजामा,

इधर उधर उछलता है

हरदम दंगा करता है,

भालू बोला ओ बंदर मामा

क्यों करते इतना हंगामा,

सफर रेल का मजा तुम लो

खाओ पियो और जमकर सो,

हरकत ऐसी अब ना करो

शैतानियों से अपने तंग न करो,

वरना टी०टी० हम बुला लेंगे

शरारत की तुम्हें सजा देंगे,

ट्रेन से तुम्हें फिर जाना होगा

जेल की रोटी खाना होगा,

मेल जोल से रहो अभी

टिके रहोगे यहां तभी।


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