STORYMIRROR

Neeraj pal

Inspirational

4  

Neeraj pal

Inspirational

शांति की तलाश।

शांति की तलाश।

1 min
23.5K

हे परमपिता !वह शक्ति मुझे दो, कभी तुमको भूल ना पाऊँ मैं

यह मन तुम में ही रमा रहे, प्रतिपल शीश झुकाऊँ मैं


 कुविचारों की आंधी ने मुझको, किसी लायक नहीं छोड़ा है

इनसे कैसे भी बचाओ गुरुवर, तुमसे ही आस लगाऊँ मैं


 यह जानकर भी वह कर्म करता, मुझको गर्त में ले जाएंगे

 नाथ मुझे वह सदबुद्धि दो, कैसे इनसे बच पाऊँ मैं


 कुपुत्र सही मैं तुम्हारा लेकिन, तुम तो जगत के पालनहार हो

तुम से ना कहूंगा, किससे कहूँगा, किस दर पर अब जाऊँ मैं


श्रद्धा -विश्वास अभी तक ला नहीं पाया, इतना बड़ा मैं पापी हूँ

 सुलभ सब कुछ तुमसे होता, अपने को कैसे समझाऊँ मैं


यह मेरे कर्मों का ही फल है, जो तुम में मिल भी नहीं सकता

लेकिन मुझे विश्वास है गुरुवर, कैसे धीर बधाऊँ मैं


सब कुछ तुमने दिया है इस जीवन मेंं, किसी बात की कमी नहीं

शांति की तलाश में भटक रहा "नीरज "किस विधि से इसे पाऊँ मैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational