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Mohanjeet Kukreja

Abstract Drama Fantasy


4.0  

Mohanjeet Kukreja

Abstract Drama Fantasy


सफ़र का सामाँ तो है…

सफ़र का सामाँ तो है…

1 min 205 1 min 205


सरक रहा आहिस्ता-आहिस्ता आसमाँ तो है

निकल रहा दम के साथ-साथ अरमाँ तो है!


जल रहा है रोज़ आँखों के आगे धुआं-धुआं

हसरतों से बनाया था जो वही मकाँ तो है !


टूटे कई रिश्ते-नाते...बिछड़ गए कुछ अपने

अश्क न सही आँखों में, दिल परेशाँ तो है !


दिखते हैं जो ख़ाली-हाथ, नज़र का धोखा है

चंद शेर, कुछ नज़्में, सफ़र का सामाँ तो है !


सुधरने से पहले इनका बिगड़ना है लाज़िम

बदलेंगे हालात सबके ऐसा कोई इम्काँ तो है !


बिल्कुल ना होने से कुछ होना कहीं बेहतर

डगमगाया हुआ ही सही, अभी ईमाँ तो है !


उस रब पर भरोसा है... मोजज़ों पे यक़ीन

हुआ ना बेशक आज तलक एक गुमाँ तो है !


लाज़िम: आवश्यक; इम्काँ: संभावना; मोजज़ा: चमत्कार; गुमाँ: अंदेशा/उम्मीद



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