सच्ची दोस्ती
सच्ची दोस्ती
निस्वार्थ भाव, “मैं” नहीं “हम”...
सच्ची दोस्ती की है बुनियादी रस्म |
दोस्त के लिए दुनिया से लड़ जाएँ...
उसको बचाने के लिए सारे जोखिम उठाए |
ना करने की है नहीं है गुंजाइश...
अगर दोस्त करे कोई फ़रमाइश |
सही- ग़लत कभी सोचा नहीं,
दोस्ती सिर आँखों पर...बाक़ी कुछ भी नहीं।
सुख हो या दुख, साथ रहेंगे -साथ चलेंगे...
किसी भी परिस्थिति की परवाह नहीं करेंगे |
अगर मौका मिले फिर एक बार, तब भी यही करूंगा...
अस्थायी ख़ुशियों की जगह, सच्ची दोस्ती ही चुनूंगा|
