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झूठ, मक्कारी और हैवानियत से अगर होना है रूबरू स्तह कुरेदो, देखो, तब होगा खेला शुरू। झूठ, मक्कारी और हैवानियत से अगर होना है रूबरू स्तह कुरेदो, देखो, तब होगा खेला ...
दिल वालों की दिल्ली अब रूखी हो रही है... जहाँ अकड़े हुए हैं लोग, हवा में भी ज़हरीली मिलावट है... फैल... दिल वालों की दिल्ली अब रूखी हो रही है... जहाँ अकड़े हुए हैं लोग, हवा में भी ज़हर...
उम्र बढ़ रही है... शिकायतें नहीं घट रही हैं | सोच छोटी रह गई, दुनिया तो चाँद पर पहुँच गई | उम्र बढ़ रही है... शिकायतें नहीं घट रही हैं | सोच छोटी रह गई, दुनिया तो चाँद पर...
क्या ज़रूरी है आगे बढ़ कर रिश्ते निभाना, कोई न करे कद्र... फिर भी गले लगाना | सबको पूछते- पूछते ज़ि... क्या ज़रूरी है आगे बढ़ कर रिश्ते निभाना, कोई न करे कद्र... फिर भी गले लगाना | स...
समय था जब मुँह से निकले बोल, माने जाते थे हीरे से भी अनमोल। स्थायी होती थी विचारधारा, सिद्धांतों का ... समय था जब मुँह से निकले बोल, माने जाते थे हीरे से भी अनमोल। स्थायी होती थी विचार...
आदर्श बनने के लिए, बहुत कुछ खोना पड़ता है। त्याग और बलिदानों का, अक्सर मोल न मिलता है। आदर्श बनने के लिए, बहुत कुछ खोना पड़ता है। त्याग और बलिदानों का, अक्सर मोल न मिल...
अर्थी पर पड़े और सेज पर सजे फूल अलग ही कहानी बयान करते हैं । बोलने व लिखने के अंदाज़ से शब्दार्थ बदल... अर्थी पर पड़े और सेज पर सजे फूल अलग ही कहानी बयान करते हैं । बोलने व लिखने के अं...
शब्द अनेक, कविता एक धुन अनेक , संगीत एक भाव अनेक, नृत्य एक भाषा अनेक , संदेश एक शब्द अनेक, कविता एक धुन अनेक , संगीत एक भाव अनेक, नृत्य एक भाषा अनेक , संदेश एक
दो - तीन बार बीच में दीदार हुआ, मनाई के डर से बात ना करने को तैयार हुआ। दो - तीन बार बीच में दीदार हुआ, मनाई के डर से बात ना करने को तैयार हुआ।
दुनिया से हुए दूर, लेकिन अपने करीब, खुद को पहचानने का मिला नसीब। दुनिया से हुए दूर, लेकिन अपने करीब, खुद को पहचानने का मिला नसीब।