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Vivek Gulati

Abstract Inspirational

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Vivek Gulati

Abstract Inspirational

राष्ट्र

राष्ट्र

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शब्द अनेक, कविता एक 

धुन अनेक , संगीत एक

भाव अनेक, नृत्य एक 

भाषा अनेक , संदेश एक

धर्म  अनेक , प्रभु एक 

प्रांत अनेक , राष्ट्र एक 

जिससे बड़ा कोई नहीं 

जिसके बिना भी कोई नहीं 

प्रजातंत्र में सब है स्वीकार 

राष्ट विरोध का नहीं है अधिकार 

सत्ता के लिए,एक दूसरे की करो बुराई 

ऐसा मत करो कि हो राष्ट्र की जग हसाई 

राष्ट्र की अस्मिता अगर घटती है 

हमारी साख, राख होती है 

कमजोर राष्ट्र का नागरिक कहलाना,

जैसे प्रतिदिन बेइज़त्ती की गंगा में डुबकी लगाना 

सत्ता के लोभ में राष्ट्र की साख को नुक़सान पहुँचाओगे 

देशवासियों की नज़रों में हमेशा के लिए गिर जाओगे

राष्ट्र को अगर महान है बनाना 

एकजुट होकर रहना,जीना और मरना!


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