छोटी - छोटी बातें
छोटी - छोटी बातें
उम्र बढ़ रही है...
शिकायतें नहीं घट रही हैं |
सोच छोटी रह गई,
दुनिया तो चाँद पर पहुँच गई |
आंकलन के मापदंड अलग हैं,
अपने लिए छूट, औरों के लिए सख़्त हैं |
सबसे अपेक्षाएं बेशुमार हैं,
जो पूरा न उतरे, वही गुनहगार है |
कब तक इन संकीर्ण गलियों में फँसे रहोगे,
दिमाग के चक्षु खोल के देखो.. ख़ुश रहोगे |
