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Vivek Gulati

Abstract Inspirational

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Vivek Gulati

Abstract Inspirational

छोटी - छोटी बातें

छोटी - छोटी बातें

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उम्र बढ़ रही है...

शिकायतें नहीं घट रही हैं |


सोच छोटी रह गई,

दुनिया तो चाँद पर पहुँच गई |


आंकलन के मापदंड अलग हैं,

अपने लिए छूट, औरों के लिए सख़्त हैं |


सबसे अपेक्षाएं बेशुमार हैं,

जो पूरा न उतरे, वही गुनहगार है |


कब तक इन संकीर्ण गलियों में फँसे रहोगे,

दिमाग के चक्षु खोल के देखो.. ख़ुश रहोगे |


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