असली चेहरा
असली चेहरा
झूठ, मक्कारी और हैवानियत
से अगर होना है रूबरू
स्तह कुरेदो, देखो, तब होगा खेला शुरू।
यही है दुनिया का दस्तूर
जहाँ जो दिखता है वो टिकता नहीं
दिल में ज़हर भरा है भरपूर।
तुमसे क्या मिल सकता है
तुम जब तक हो उपयोगी
दूध में मक्खी की तरह निकाले जाओगे
पल भर में सोने की लंका राख होगी।
सबसे बड़े ज्ञानी तब बनोगे
जब इंसान को पहचानोगे
नहीं तो झूठ और मक्कारी से
हमेशा मात खाओगे।
