दिल्ली का दिल
दिल्ली का दिल
दिल वालों की दिल्ली अब रूखी हो रही है...
जहाँ अकड़े हुए हैं लोग,
हवा में भी ज़हरीली मिलावट है...
फैले हुए हैं बहुत सारे रोग |
दिल हो रहे हैं छोटे...
मगर सड़के बन रही हैं चौड़ी,
जलते हैं हम लोगों को आगे बढ़ता देख...
मौके पर काटते है उनकी सफलता की डोरी |
गुस्सा हमारा रहने लगा है नाक पर...
ट्रैफिक और पार्किंग से ये ओर बढ़ता है |
लड़ने, मारने के लिए तैयार हैं क्यूँकि...
हर किसी का बाप कुछ ना कुछ होता है |
बाहरी लोगों को अपना बनाती...
हर भाषा और संस्कृति को देती सम्मान |
विविधता में ही एका है...
दिल्ली की है यही शान |
