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कुमार जितेंद्र

Inspirational

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कुमार जितेंद्र

Inspirational

सबल

सबल

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ये जो सितारे..जगमगा रहे हैं,

उन्हें जगाने वाले हम हैं

सुख- चैन के ..जो अनेकों साधन

उन्हें चलाने वाले हम हैं

अट्टालिकाओं की दीवारों में..

सजी जो ईंटें, तपाते हम हैं

हमीं से सारी..शान-ओ-शौकत,

सोचो जरा तुम, कहाँ न हम हैं ।

डिगे ना हम, कभी डगर से

बरसे मेघा,या आग हम पे

तैनात तत्पर, मिटाने तम को

रुके न तब से,चले हैं जब से

लड़ते हैं रण,करने पूरे सपने..

देखी जो आँखे,मेरे वतन ने

सुनहरा कल..सजाने वाले,

कल भी हम थे,कल भी हम हैं ।

अड़े जो हम,अपनी ज़िद पे

शिखर अकड़,पग में धूल खाये

कड़ी चट्टानों के दंभ हमसे,

टकराए तो फिर,माफ़ी न पाये

सुदूर गाँव में,चमकते जुगनू ..

उन जुगनुओं की चमक में हम हैं

रौशन घरों के..जब कोने- कोने,

समझ ये लेना, हम काम पर हैं ।

डरें कभी ना,चुनौतियों से

भूमि पे हों ..या हों भूमिगत

भले जटिल है,जवाबदेही

इरादा अपना,सदा है अविचल

रचते हैं गाथा हम पसीनों से..

हमारा हर दिन नया जनम है ।

सबल श्रमिक हम वसुंधरा के,

जगमग हिंदुस्तां,जब तलक हम हैं ।।


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