सबक
सबक
सबक ज़िन्दगी से कुछ ऐसा मिला है
बस जो हमने चाहा है वही नही मिला है
शिकवे तेरे से कर तो लिए है बहुत
भूल गया था आखिर तेरा मेरा रिश्ता ही क्या है
आखिर क्यों होगी ये कहानी मेरे नाम से मशहूर
इस कहानी में मेरा किरदार ही क्या है
बडी होशयारी से सब बुलवा किया उसने मुझसे
अब मेरे पास मेरा बचा ही क्या है
वो जो मंजूर नही है तुमको, इसमे तम्हारी खता क्या
मेरी ही एक ओर खता है और क्या है
तुम्हारा कोई दोष नही,वो जो मेरा है वही मुझे इंसाफ न दिला सका
अब ज़िन्दगी क्या, उम्रकैद की सजा है ओर क्या है।
