STORYMIRROR

Pratit Pingle

Others

3  

Pratit Pingle

Others

नफ़रत करना चाहता हूं,

नफ़रत करना चाहता हूं,

1 min
223


मोहब्बत को हरा देना चाहता हूँ।

मैं अब उससे नफरत करना चाहता हूँ।।


अबकी बार जैसे खुद को ही उतार दिया है मैदान में

अबकी बार खुद को ही हरा देना चाहता हूँ।।


पैहम ही ज़ख्मों पर नमक डालता हूँ अपने।

मैं दर्द को हारते हुए देखना चाहता हूँ।।


मोहब्बत का जो चक्रव्यू बिछा दिया है तुमने मेरे चारसु

मैं अर्जुन बनकर उसे तोड़ना चाहता हूँ।।


सुना है मोहब्बत हरा देती है हमेशा ही नफरत को

तो मैं इस सुनी को अनसुनी कर देना चाहता हूँ।।


उसकी तारीफ में भरे पन्नो पर नमी आ गई है

सो अब मैं उसे जला देना चाहता हूँ।।


शब्-हाए-कार मैं उसके 

मुहाल को मुमकिन कर देना चाहता हूँ।।


माना चाँद नायाब है पर मुक्कमल तो नहीं

मैं ये रात को बता देना चाहता हूँ।।


मैं मोहब्बत को हरा देना चाहता हूँ।

उससे अब नफरत करना चाहता हूँ।





विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन