STORYMIRROR

Ragini Ajay Pathak

Abstract Children

4  

Ragini Ajay Pathak

Abstract Children

सबक

सबक

1 min
218

जिंदगी इतनी व्यस्त हो गई थी कि

अपनो से मिलने के लिए तरस गयी थी


दादा दादी नाना नानी कौन कहे

नन्ही आंखें माता-पिता से मिलने को तरश गयी थी


हाई फाई लाइफ में फैमिली लाइफ मिस हो रही थी

बच्चो की बुढ़ों की दुआ ऐसी कबुल की ईश्वर ने 


कि घंटे और दिन की क्या बात करे

अब महीनों से है संग में


सच ही कहा हैं बुजुर्गों ने बुरा वक़्त भी

कुछ अच्छा ले के आता है। 


जाता है अपने समय पर पर कुछ

अच्छी यादें और कुछ सबक भी दे जाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract