Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Tragedy

4.7  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Tragedy

सैनिक की डायरी...

सैनिक की डायरी...

2 mins
18


बटुए में रखी अपनों की तस्वीरें 

जब आंखों के सामने अचानक तैरने लगती हैं,

तब अहसास होता है 

हम सैनिक तो हैं पर इंसान भी..!

हमारी भावनाओं के 

ज्वार भाटा भी उठते गिरते हैं,

आंसू हमारे भी बहते हैं।


पास हो रहे धमाकों के बीच 

जब हम अपने किसी साथी को खो देते हैं,

तो दर्द बढ़ने लगता है 

दम सा घुटने लगता है,

मृत्यु का संगीत चारों ओर बजने लगता है 

पर मौतों से युद्ध नहीं ठहरा करते।


वक्त रुकता भी नहीं बल्कि 

यह तेज भागने लगता है,

गोलियों की आवाज 

कानों के परदे फाड़ने लगती है,

अनगिनत लाशों के बीच 

मन घबराता नही 

बल्कि 

भय और चिंता से उबर आता है। 


एक गोली और मृत्यु 

आगोश में लिए 

आसपास मंडराती पास बैठ जाती है। 

सब तो क्षणिक है 

शत्रु आस पास नही बल्कि 

हमारे अंदर बैठा वो दर्द है,

दुःख है, जो उदास हो ही नहीं सकता 

क्यों कि जिंदगी दांव पर जो लगी है।


युद्ध में खुद को जिंदा रखना होता है 

बस लड़ना होता है,

आगे बढ़ना होता है,

खाईयां और चौड़ी होती जाती हैं 

रक्त ही रक्त सने जिस्म

और सांसे उफान पर होती हैं।


गोलीबारी बम धमाकों के बीच 

टूट रही सांसों को बचाने

बेशक हम टूट पड़ते हैं,

साथियों के मृत शरीरों के साथ

जो पल भर पहले कांधे से कांधा लगाए लड़ रहे थे,

अब अनजान धूल के गुब्बार में 

सने शांत हो गए हैं। 

मन विचलित होता है पर 

लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित होना जरूरी है,

युद्ध में जीवन और मृत्यु की यही परिणीति है। 

यहां शोक मनाने

रोने का समय,

कहां किसी के पास होता है,

यहां दुःख की कोई रस्म अदायगी नही होती।


दुःख से दूर भागने का प्रयास करते हैं 

पर दुःख यह तो चारों ओर बिखरा पड़ा है,

यहां हमने किसी को खोया नही 

बल्कि खुद कई बार मरे हैं। 

और यह सब हमने 

अपने हृदय की काल कोठरी में,

बांध कर सहेज लिया है 

कभी फुर्सत में रोने के लिए..!

यह लड़ाई है एक सैनिक की खुद से है

जो बेहद खतरनाक है,

पर यहां हम क्यों हैं इसका हमे पता नहीं।


यह समझ से परे है,

और तब ज्यादा कचोटती है,

जब हम लौट कर खाली हाथ 

ठहरे हुए आंसुओं से सामना करते हैं,

जिन्हें हम पीछे छोड़ आए थे।

आज उम्र के आखिरी पड़ाव में,

जब हम युद्ध से कोसों दूर 

उन पलों को याद करते हैं,

तब अहसास होता है 

जिंदा रहना आसान है,

सैनिक बनना आसान नहीं..!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract