सावन का उल्लास
सावन का उल्लास
क्या नदिया क्या वसुधा,स्नेह त्वरित सब
निर्मल हरित है जीवन अब,
देख देख सराष्टि का वैभव
मन थिरकें नितांत हर क्षण अब
कविता के छंद और चाय का प्याला
कुरकुरे पकोड़े और चटनी के दौर अब
तरबतर सा आँगन ,धुली हुई सड़के
सावन का उल्लास लाया ये सब !
झमाझम बारिश की बूँदे, तितली सा मन
चितचोर चमकीला इंद्रधनुष अब
नयनों में झूमे मयूर की अटखेलियाँ
सावन का उल्लास लाया ये सब !
